Saturday, April 4, 2015

ग्रामीणो की स्वास्थ रक्षा हेतु

Monday, May 7, 2012

अब डाकू दिल्ली में बैठते हैं: बाबा रामदेव

योगगुरु बाबा रामदेव ने एमपी में एक सभा में कहा है कि अब डाकुओं का प्रमोशन हो गया है और वे अब दिल्ली पहुंच गए हैं, वही दूसरी ओर बीजेपी के रामदेव से दूरी बनाने के बावजूद एमपी के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने रामदेव की खूब तारीफ की है।
रामदेव ने कहा कि देश तो संसद में बैठे 543 लोग ही चलाएंगे, लेकिन उन्हें रोगी नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में सोमवार सुबह पांच बजे यहां स्टेडियम पर आयोजित योग शिविर में बाबा रामदेव ने फिर एक बार आरोप लगाया कि संसद में बैठे कुछ सदस्य दुराचारी, भ्रष्टाचारी और हत्यारे हैं। जनता को चाहिए कि वह ऐसे लोगों को चुनकर देश की सर्वोच्च संस्था में नहीं भेजे।
इससे पहले शनिवार शाम भिंड से मुरैना आते हुए पोरसा में आयोजित एक सभा में उन्होंने कहा कि डाकुओं का प्रमोशन हो गया है और वे अब जंगल से निकलकर दिल्ली पहुंच गए हैं। जनता ऐसे लोगों को चुनकर लोकसभा और विधानसभाओं में नहीं भेजे। इस अवसर पर वह अमर शहीद पंडित रामप्रसाद बिस्मिल के पैतृक गांव बरवाई पहुंचे और उनकी प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
उन्होंने कहा कि आज महंगाई की मार से आम आदमी बेहद परेशान और दुखी है और सरकार कुछ नहीं कर रही है। कालाबाजारियों के हौसले बुलंद हैं। विदेशों में जमा कालेधन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वह इसे अपने देश में लाने के लिए अंतिम सांस तक लड़ते रहेंगे।
इस अवसर पर सीएम चौहान ने बाबा रामदेव को देश का क्रांतिकारी संत बताते हुए कहा कि विदेशों में जमा काला धन वापस देश लाने, भ्रष्टाचारियों को खदेड़ने और योग शिक्षा प्रसार की मुहिम में वह बाबा रामदेव के साथ हैं। उन्होंने कहा कि बाबा रामदेव मध्यप्रदेश आए हैं और वह मेहमान हैं। प्राचीन परंपरा रही है कि राजा उसके राज्य में आए मेहमान का स्वागत करता है, इसी गौरवशाली परंपरा को निभाने और एक संत का अभिनंदन करने वह यहां आए हैं। उनकी सरकार भी प्रदेश से भ्रष्टाचारियों को खदेड़ने और कालेधन को निकालने का अभियान चलाया हुआ है।

Saturday, October 22, 2011

हमें इन नस्ल बिगाड़ो के समर्थन की आवश्यकता नहीं |

तथाकथित "'नस्ल बिगड़ सेकुलर बुधिजिवियो ""के समर्थन की क्या आवश्य्कता हे |
आज जिस प्रकार के हालत भारत ओर सारे विश्व में बन रहे हे उनमे सबसे विकट हालात में से एक भारत देश भी हे |हालाँकि उपरी तोर पर से देखने में सब कुछ अच्छा ओर चमकदार दिखाई दे रहा हे ,भारत दो अंको विकास दर को छू रहा हे ,मजबूत लोकतंत्र दिखाई दे रहा हे ,सेना मजबूत दिखाई दे रही हे ,करोड़पति अरबपति बढ़ रहे हे ,निवेशक आकर्षित हो रहे हे |
लेकिन ये केवल २०% लोगो के लिए ही हे उन्ही की तस्वीरे पेश की जारही हे |बाकि सब गल्लम ग्प्प्प चल रहा हे ,कोई नहीं कह सकता की बाकि ८०% लोगो के लिए ऊंट किस करवट बेठे ?
इन्ही २०% लोगो में से वो बुद्धिजीवी वर्ग भी आता हे जिन्हें अपनी आमदनी कमाने के लिए कुछ भी जद्दोजेहाद नहीं करनी पडी हे |,नेता के रूप० में खाऊ गिरी ,दलाली ,रियल स्टेट , प्रोपर्टी, ही प्रोफाइल टर्म्स ,तलवे चाट के विभिन्न विदेशी फंड के रूप में भीख खाऊ एन.जी.ओ दलाल ,अपनी बीबियो बहिन बेटियों को आगे कर के ,रिश्वतखोरी कर के ,गट्टर गंदगी में नहा के ,देशद्रोह कर के देश बेच के ,भांड गिरी कर के ,चमचा गिरी करके ,यानि किसी भी तरह पैसा कमाया जाये ,इस वर्ग का प्रमुख उद्देश्य हे |इस वर्ग में इस भावना का कोई महत्व नहीं की अपना धर्म देशप्रेम ,रास्ट्र प्रेम के जज्बे का क्या मतलब हे ?इनके लिए धर्म का मतलब अपनी और परिवार की भरपूर पेट पूजा और मंदिर में जा कर आना और दिखावा करना ही हे |आप पाएंगे की इस वर्ग में से कोई भी बाप अपनी ओलाद को सेना में नहीं भेजना चाहता हे |सेना में जितने भी जवान जाते हे वो सभी गरीब ,गाँवो के घरो से आते हे ,जिन्हें घर चलाने के लिए नोकरी की आवश्यकता होती हे |
मुख्त्या ये वर्ग दलाली ओर तलवा चट्टू के रूप में सत्ता संस्थानों के इतने करीब होता हे उनके महत्वपूर्ण निर्णय तय करने में प्रभावशाली भूमिका रखता हे |मिडिया को कुशल नट की तरह इस्तमाल करते हुवे सरकारों ओर आमजन पर अपना प्रभावशाली नियन्त्रण भी ये वर्ग रखता हे |
भारत में आजादी के बाद से ही कांग्रेस के राज में इस वर्ग को भरपूर फलने फूलने का अवसर मिलता लेकिन १९९२ के बाद मनमोहन जी की आर्थिक नीतियों ने इस वर्ग की आर्थिक आकंक्षवो के चार चाँद लगा दिए ,ओर ये वर्ग उतना ही भ्रस्ट ओर नीचे गिरता चला गया |इन्ही आकान्क्षावो ने नीचले तबके के सपनो के पंख लगा के उन्हें भी भ्रसटाचार की गट्टर गंगा में नहाने के लिए आमंत्रित लिया |
अब इसी तथाकथित सेकुलर और श्रेष्ठी कहलाने वाले ""नस्ल बिगाड़ "" हाईप्रोफाइल वर्ग ने बाकी सभी जनता को आर्थिक सामाजिक ,राजनितिक ,बोधिक ,शेक्षणिक ,सभी कारको और विषयों पर बंधक बना लिया हे |
बाकी बचे जो लोग सही और सच्ची भावना से रास्ट्र और धर्म के बारे में सोचते हे ,जो इन विषयों पर रास्ट्रवादी भावना का जन जन में प्रसार करना चाहते हे |जो लोग अपने धर्म के हास और उसके पतन से चिंतित होते हे |जो रास्ट्र और धर्म का हास और नुक्सान करने वाली शक्तियों का विरोध करना चाहते हो |वो लोग और वो संघटन्न भी इन्ही छद्दम सेकुलर रास्ट्र द्रोही ,धर्म द्रोही व्यक्तियों के भंवरजाल में फंस चूके हे |
भारत वर्ष में ये स्थिति आ चुकी हे की आज बात बात पर, हर रास्ट्र धर्म के पक्ष वाले मुद्दे पर ,कदम कदम पर रास्ट्रवादी संघटन और व्यक्ती इन छद्दम सेकुलर नस्ल बिगाड़ लोगो से समर्थन की अपेक्षा लगाये रखते हे ,जो की रात भर साथ सो जाये तो भी नहीं देने वाले हे

|आज चाहे भारत के अभिन्न अंग कश्मीर की बात हो ,चाहे कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्य में सेना के अधिकारों की बात हो .चाहे तिरस्कृत और बलात्कृत कश्मीर से निकाले गये कश्मीरी पंडितो की बात हो |चाहे भ्रसटाचार काले धन के मुद्दे पर बाबा रामदेव के आन्दोलन अभियान की बात हो ,और उस पर किया गया सरकारी वहशी तांडव हो या अन्ना दुआरा छेड़े गये आन्दोलन की बात हो ,भर्स्ट सरकार के नकटेपने और कमीनेपन का मुद्दा हो ,भले ही अपनी अस्मिता और सनातन धर्म के आधार तत्व रामसेतु का मुद्दा हो ,राममन्दिर जेसे आन्दोलन का मुद्दा हो ,भले ही साम्प्रदायिक निरूपण बिल का मुद्दा हो ,चाहे अमरनाथ यात्रा को पाखंड कह देने की हिम्मत किसी ने कर ली हो ?चाहे भारत में अधिसंख्य हिंदुवो की अस्मिता से बलातकार होता हो ,उनकी मुख्य धार्मिक यात्रावो पर २० २० गुना टेक्स बढा दिया गया हो ???..............______________________?
क्या होता हे इन मुद्दों पर ?आम हिन्दू और बाकी अपने को रास्ट्रवादी कहलाने वाले संघटन्न क्या करते हे सब से पहले इस सभी बातो और मुद्दों पर ?
एक उम्मीद की ""हमारे ही देश के जाने पहचाने ,यंही की खा के उसी की बजाने वाले छद्दम सेकुलर नस्ल बिगाड़ हमारा समर्थन करेंगे ?बस यंही मात खा जाते हे|जो लोग इन्ही बातो के लिए जाने जाते हे ,जिनका मूल धंधा ही धर्म विरोध और देश के खिलाफ काम करना हे और पेट भरना हे तो क्या उम्मीद लगा कर उन से समर्थन की उम्मीद लगा बैठते हे हम लोग ?
मिडिया भी उन्ही में से हे |फिर हम उन्हें लानत मानत भेजते हे बुरा भला कहते हे ,उनकी भर्त्सना करते हे |मिडिया को पक्षपाती कहते हे ,वो तो होगा ही पक्षपाती क्योकि उसे गुलामी करने के पेसे मिलते हे ,और इन्ही उपरी उल्लेखित २०% लोगो की नट विद्या से मिडिया चलता हे |ताजुब्ब की बात तो तब होती हे की अच्छी तरह से संघटित संघटन्न भी इनके फेर में पड़ कर इन्ही की पूंछ पकड़ने की कोशीश करते हे |आर .एस.एस विश्व का सब से बड़ा अनुशासित संघटन्न हे ,उसे प्रचार की भूख भी नहीं हे ,लेकिन वो अपनी मान्यताये और हिन्दू कल्याण की बात हिंदुवो में ही स्पष्ट रूप से नहीं रख पायेगा तो जाहीर हे हिंदुवो के खिलाफ काम करने वाली शक्तिया उन्हें जल्दी ही मानसिक रूप से बहका सकेगी |एक हद तक अपनी अपनी लाइन में चलना सही हे ,लेकिन कोई चुनोती दे तो फिर ,अपने धर्म रास्ट्र को गाली दे तो फिर ?क्या इन्हें पत नहीं हे की किस तरह हिन्दू देवी देवता और उनकी मन्य्तावो के खिलाफ विषवमन किया जा रहा हे ?क्या उनकी युवा काडर में इतना दम नहीं की ऐसे लोगो की
थोड़ी सर्विस कर दी जाये ग्रीस पानी .आयल पानी कर दिया जाये जिस से ये थोडा स्मूथ चले |
यंहा धन्यवाद देना चाहूँगा शिवसेना की स्पष्टता और दिलेरी को जिन्होंने प्रशांत भूषण की ""जंवारी ""करने वाले तीनो वीरो तेजेंद्र सिंह जी और उनके साथियों का खुल के अभिनन्दन किया हे जबकि किसी भी अन्य हिन्दू संघटनों और देशभक्ती रखने वाले लोगो ने बिलकुल आवाज नहीं उठाई !! उलटे एक अपराधिक चुप्पी साध ली की जेसे इन शेरो ने बहुत बड़ा अनर्थ कर दिया हो ,श्री राम सेना तो साफ तोर पर गोल बोल गयी की हमारे आदमी ही नहीं थे ,होना ये चाहिए था की ये संघटन्न ऐसे वीर युवावो का अभिनन्दन करते उनकी होसला अफजाई करते ,उनके स्पष्ट और त्वरित नजरिये की सराहना करते ,लेकिन ये भी तो इन्ही छद्दम सेकुलरो के भंवर जाल में ही तो फंसे हुवे हे ,की छद्दम सेकुलर लोगो के सामने हम आँख नहीं मिला पाएंगे ,मीडिया नाराज हो जायेगा ,सेकुलरो अभिव्यक्ती की आजादी नाम का तूफ़ान उठा लेंगे |इसी भीरुता और छद्दम सेकुलरता के माथा देने के कारण आज आडवानी देश का प्रधान मंत्री बनने का सपना दिल में ही ले कर इस इस दुनिया से विदा हो जायेंगे |हमें अब ऐसे ही स्पष्ट नजरिये की आवश्यकता हे ,ज्यादा सीधे सच्चे हिन्दू बन के जीने की अवश्यकत नहीं हे ,ज्यादा जेंटल बन के रहने से फायदा कम नुकसान ही ज्यादा हुवा हे |हमें इन छद्दम सेकुलरो से अपने नम्बर बढवाने की कतई आवश्य्कता नहीं हे ,ना ही हमें इस बात की परवाह करनी हे की सो काल्ड सभ्य समाज हमे क्या कहेगा ?छद्दम सभ्य बनने के चक्कर में हम बहुत खो चूके हे ,इसी बात का फायदा उठा के हमारी कोई भी बजा के चला जाता हे |हमें अपने धर्म और रास्ट्र के मान अपमान पर खुला एवं स्पष्ट दृसटीकोण प्रस्तुत करना होगा |
हमें इन छद्म सेकुलर ""नस्ल बिगाड़ो " के समर्थन की कतई आवश्यकता नही हे ,ना ही हमें उम्मीद लगनी चाहिए के ये लोग कभी पक्ष में भी बोले |हमें आवश्यकता हे तेजेंद्र पाल जी जेसे नवयुवको की और जेसे को तेसा प्रदान करने वाली त्वरीत प्रतिक्रिया की |हमे उन छद्दम सेकुलर और रास्ट्रद्रोही धर्मद्रोही लोगो और उनके पालतू मिडिया को ऐसे ही जवाब देना हे जेसा तेजेंद्र पल जी ने दिया और अग्निवेश को गुजरात में एक महात्मा ने दिया |यदि किसी को अभिव्यक्ती की आजादी हे तो हमे भी हमारे गोरव प्रतीकों रास्ट्र और धर्म की रक्षा का अधिकार हे |कानून अपनी जगह हे ,यदि कोई किसी को गोली मारता हो तो खाने वाला ये सोच के निश्चिन्त नहीं हो जायेगा की कानून पाना काम करेगा .कानून तो काम करता रहेगा पहले जो अपना फर्ज बनता हे वो पूरा करेंगे |
जय हिंद वन्देमातरम

Friday, October 21, 2011

मोदी जी ,गुजरात की सध्भावना शांति के खिलाफ ये कांग्रेस की ही चाल हे !!!


गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेंद्र भाई मोदी जी इन दिनों गुजरात में सध्भावना मिशन पर हे |वो गुजरात प्रत्येक जिले में इस मिशन के तहत जा रहे और लोगो से मेल मुलाकत कर रहे हे उनकी उन्नति विकास और सुख दुःख की भागीदारी के तहत बारीकी से नजर रख रहे हे |एक सफल शासक का यही फर्ज बनता हे |पिछले दस सालो से गुजरात में शांति और सध्भाव की जो गंगा बही हे ,वो किसी अन्य राज्य में नहीं बही हे |मजदूर किसान से ले कर उद्योगपतियो तक के लिए गुजरात एक आदर्श भूमि बनी हे |भारतीयता को साथ लेकर विदेशी तकनीकी के साथ नए विचार नए प्रोग्राम योजनावो से नरेंद्र भाई जी ने गुजरात को देश में ही नहीं विदेशो में रोल मॉडल बना दिया हे |
पिछले दस सालो की हिंदुत्व के पैमाने पर गुजरात की शांती , विकास और सबसे बड़ी अकुलाहट ये की अभी गुजरात में सत्ता में आने की कोई सो कोस तक कोई सम्भावना नहीं ने ""भारत के एक परिवार बपोती ""अखिल भारतीय दरी जाजम उठाऊ लिमिटेड कम्पनी "" को घोर निराशा से भर दिया हे |निराशा फसट्रेशन में कोई भी स्तनधारी की ओलाद मनुष्य अगले के खिलाफ घातक कदम उठता ही हे |येन केन सभी कोशीशे करता हे ,जब इन सालो में राजनितिक कमीनेपन में माहिर इस ""दरी जाजम उठाऊ कम्पनी"" ने सभी कदम उठा के देख लिए ,तब भी इसके मूह पर गुजरात का मतदाता उल्टे जूते की मरता रहा |
चूंकि विकास के पीछे स्थाई शांती की आवश्यकता होती हे और वो गुजरात में बनी हुयी हे ,ये शांति समुदायों और समाजो के बीच बनी हुयी हे |इस से सभी लाभ्नविंत हे |लेकिन ये शांति ही तथाकथित नस्ल बिगाडू सेकुलरो और कांग्रस के टुकडो पर पलने वाले मूह पर खून लगे भारतीय मिडिया की आँख की किरकिरी बनी हुई हे |पिछले दस सालो से ना जाने कितने नस्ल बिगाड़ कूका कूका के शांत हो चुके हे ,लेकिन जिस प्रकार रह रह इन्हें हिस्टीरिया का दोरा पड़ता हे इनके पूर्ण स्वस्थ होने की सम्भावना कम हे ?
इनका मिशन गुजरात में शांति सद्भावना को पुन बिगाड़ के खेल खेलना हे !!पिछले दिनों अहमदाबाद में मोदी जी के तीन दिवसीय सध्भावना सभा में एक तथाकथित सूफी मोलवी ने नरेंद्र मोदी जी को शाल ओढा दी उसके बाद उसने मोदी जी को मुस्लिम टोपी ओढ़ने की कोशीश की जिस से मोदी जी ने विनम्रता से अस्वीकार कर दिया ,उसके बाद भारतीय मिडिया रूख देखना तारीखे काबिल था?मिडिया को पेट में मरोड़ उलटी दस्त एक साथ चालू हो गयी ,मोदी जी को हिन्दू कट्टरवादी तो मिडिया ने पहले ही घोषित कर रखा था उसके बाद मोदी जी घोर साम्प्रदायिक घोषित हो गये !!बाद में मालूम पड़ा की तथाकथित मोलवी जी सोनिया गाँधी के निजी सचिव अहमद पटेल के उस क्षेत्र से थे जंहा से उन्होंने चुनाव लड़ा था और बुरी तरह हार गए थे |ये मोलवी कांग्रेस के दुआरा ही हांयर किये थे और टोपी ओढ़ना भी प्री ड्रिल प्रोग्राम था |कांग्रेसियों के कहने पर इन्होने ये कार्यक्रम रचा था |
अब नए घटनाक्रम में नवसारी में किसी मुस्लिम शख्श ने उन्हें काफा ओढाने की कोशिश की ,उसे भी मोदी जी ने विनम्रता पूर्वक गले लगा के हाथ जोड़ लिए |अब फिर भारतीय मिडिया में हाय तोबा मच गयी ,की मोदी जी विवादों को जन्म दे रहे हे |क्या मिडिया ये भूल जाता हे की सार्वजनिक हस्ती होते हुवे भी किसी के नीजी धार्मिक आध्यात्मिक मापदंड भी होते हे |क्या मिडिया से ये प्रश्न नहीं पूछा जाना चाहिए की इन बातो पर मुद्दों पर मुस्लिम धर्म गुरु ,मुल्ले मोलवी कितना अम्ल कर पाएंगे ?जो बात बेबात फतवे जरी करते हे और मोदी जी की व्यक्तित्व की नहीं विकास तारीफ करने मात्र से ही व्स्तान्वी जेसे उदार मुस्लिमो की उनके पद से बलि ले ली जाती हे |
इन सब के पीछे एक मात्र राजनितिक कमीनेपन में माहिर "'अखिल भारतीय दरी जाजम उठाऊ लिमिटेड कम्पनी की चाले हे |क्योकि गत पंचायती चुनावो में भी गुजरात के १०० से अधिक मुस्लिम उमीदवार बी.जे.पी के उमीदवार के रूप में जीत कर आये हे |वंहा के उदारवादी मुस्लिम नरेंद्र मोदी जी के विकास की तारीफ करने लगे हे ,क्योकि कभी कठिनाइयों से घीरे रहने वाले इस तबके को विकास का लाभ काफी पहुंचा हे |
नरेंद्र मोदी जी को धुर मुस्लिम विरोधी घोषित करने के लिए इस तरह की ओछी हरकते करना कांग्रेस के लिए बांये हाथ का खेल हे और इस खेल में साथ देने के लिए जन्मजात भांड भारतीय मिडिया भी साथ हे |लेकिन जितनी ताकत से गुजरात में नरेंद्र मोदी के खिलाफ इन नस्ल बिगाडू सेकुलरो ,भांड मिडिया और दरी जाजम उठाने वालो ने अभियान छेड़ा उसी अनुपात में गुजरात के मतदाता ने इनके मूह पर जूते बजाये हे |और इन्तजार कीजिये अबकी बार तो ऐसे बजेंगे की रोने फिर नहीं देगा गुजरात का मतदाता इन्हें |
वन्देमातरम

Wednesday, October 19, 2011

क्यों ना ऐसे लोगो का मूह काला करके गधे पर बिठा के घुमाया जाये ?



इन दिनों विश्व में किसी भी स्थान को छोड़ के केवल भारत में ही अभिव्यक्ति की आजादी और निजी विचारो के नाम पर उलटिया करने का दोर शुरू हो गया हे |ये उलटिया वो ही ""नस्ल बिगाड़ "कर रहे हे जिन्हें विदेशी भीख हजम नहीं हो रही हे |केंद्र सरकार से अभयदान पा कर अपने विदेशी आकावो की पलना में ये ""नस्ल बिगाड़ "" इसी तथाकथित आजादी के नाम पर गंदगी उगल रहे हे |पिछले दो सालो में इन सेकुलर गुर्गो और जोकरों के पेट मरोड़ कुछ ज्यादा ही उठ रही हे ,क्योकि जितनी ज्यादा ये गुर्गे हिन्दू धर्म ,अस्मिता ,रास्ट्र की सुरक्षा ,एकता के खिलाफ जितनी गंदगी उगलेंगे उसी अनुपात में इनकी विदेशी भीख बढना तय हे |
तथाकथित आधुनिक इन ""नस्ल बिगाड़ो "को खाद पानी जे.एन.एल.यु.और देल्ही यूनिवर्सिटी जेसे वामपंथी कारखानों से मिलती हे |जंहा ये गुर्गे दलितवाद ,दलित उत्थान और पिछड़ा वर्ग के नाम गिरोह तेयार करके अपनी दूकान चलते हे और विदेशी आकावो से नम्बर बढ़वाते हे |इन्ही वादों का सहारा लेकर उसकी आड़ में धर्म परिवर्तन करवाते हे |इसमें इनका प्रमुख हथियार हिन्दू धर्म को गरियाना ,उसकी मनचाही व्याख्या करना और उसके महापुरुषों का चारित्रिक कुरुपण करना हे |
ताजाघटना क्रम देल्ही युनिवरसिटी के कोर्स में पिछले दो सालो चलित ऐ.के रामानुज दुआरा लिखित ""रामायण पर लिखे गये एक विवादास्पद निबंध को कोंसिल के दुआरा हटा दिया गया हे |इस पर वंहा के इतिहास के कुछ "'नस्ल बिगाड़ "'बुधिजीवियो ने विवाद खड़ा कर दिया हे |इस निबंध में सीताजी को रावण की बेटी बताया गया हे,और सीता जी को राम की बहिन तक बता दिया गया हे |वंही हनुमान जी के चरित्र पर लांछन लगते हुवे उन्हें स्त्री रसिक और महिला प्रेमी तक बता दिया गया हे |इसे घोर कुकृत्य को जायज ठहराते हुवे पिछले दो सालो में नजाने कितने विद्यार्थीयो को इस तरह की गंदगी की घूंटी दी गयी हे ?
समकालीन इतिहास विभाग के एक प्रोफेसर आदित्य मुखर्जी का कहना हे की इस निबंध को हटाना बेबुनियाद हे रामायण को ले कर कई तथ्य हे |डी.यू.का डेमोक्रेटिक टीचर फोरम जो की ईसाई संस्था दुआरा संचालित हे उसने भी इस निबंध को हटाने का विरोध किया |वामपंथी विचारधारा से प्रेरित दो छात्र संघटन्न - स्टुडेंट्स फेडरेशन आँफ इडिया और आल इण्डिया स्टुडेंट्स फोरम भी इस निबन्ध के हटाने के विरोध में उतर आया हे और इसे वापस शामिल करने की मुहीम छेड़ने जा रहा हे |
क्या ये किसी भी हिन्दू धर्म से सम्बन्धित व्यक्ती को सन्न कर देने के लिए काफी नहीं हे की किस भोंडे रूप में इन ""नस्ल बिगाड़ "'कारखानों में हिन्दू धर्म और रास्ट्र का स्वरूप विकृत किया जा रहा हे |क्या सोच सकते हे की किसी अन्य धर्म के बारे में इस तरह की गंदी बाते लिख भी डी जाती तो केसे इन लोगो की अंतड़िया निकाल लीजाती ?याद कीजिये अभी छह महीने पहले केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रम में मोहमद का चित्र किसी लेखक के पाठ में छाप दिया गया था ,केसे सुबह तो मिडिया में खबर आयी और दोपहर होते होते उसे हटा दिया गया |
क्या सहिष्णुता का यह मतलब निकला जाये की करोड़ो लोगो की आस्था को कुछ लोग अपनी अभ्व्यक्ति की स्वतन्त्रता और निजी राय की मनचाही व्याख्या के रूप में एक विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में भी शामिल कर ले और उलटे सीधे तर्क दे कर उसे सही ठहराने की कोशीश भी करे |यदि वो सीमा लांघे तो सहनशीलता एक हद तक ही अच्छी रहती हे ,फिर ये आजादी अगर सीमा लांघे तो क्या सामने वालो को आजादी नहीं की इसे लोगो को मोका पड़ने पर मूह काला करके गधे बिठा के घुमाया जाये ?कानून का तो इसे ""नस्ल बिगाड़ "'लोगो को डर तो रहता नहीं हे क्योकि इन लोगो की माई बाप सरकार अभी केंद्र में बेठी हे |अभी लोगो की जगह जगह आरतिया उतारी गयी हे धन्यवाद ऐसे हिम्मत वाले वीरो को जिन्होंने हिम्मत करके इन्हें सबक सीखने की जहमत उठाई हे |
वन्देमातरम

Thursday, September 29, 2011

इसलामिक अतिवाद की और बढ़ते हुवे भारतीय मुस्लिम !! परसों राजस्थान के बूंदी जिले के नेनवा कस्बे में एक ऐसी घटना हुयी जिस से भारतीय मुस्लिमो की मानसि

अभी परसों राजस्थान के बूंदी जिले के नेनवा कस्बे में एक ऐसी घटना हुयी जिस से भारतीय मुस्लिमो की मानसिकता को समझा जा सकता हे और रास्ट्र के खिलाफ जहर घोलती उनकी इछावो को पहचाना जा सकता हे |इसे एक साधारण घटना मान कर मिडिया ने भी उपेक्षित किया हे वो भी किसी खतरे की घंटी से कम नहीं |
कोटा स्मभाग में पड़ने वाले बूंदी जिले की एक तहसील हे नेनवा |वंहा लोक देवता देह्वाल्जी का मेला हर श्र्दीय नवरात्र को लगता हे और इसी अवसर पर यंहा विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यकर्म होते हे उन्ही में २८ सितम्बर की शाम यंहा अखिल भारतीय विराट कवी सम्मेलन का आयोजन किया गया था जिसमे देश के विभिन्न भागो से विभिन्न रस के कवी आये थे
|उन्ही में से एक लखनुऊ से पधारे वीर रस के कवी श्री वेदव्रत वाजपेयी अपनी कविता पाकिस्तान के खिलाफ सुना रहे थे |वंहा श्रोतावो की अपार भीड़ जमा थी और श्री वेदव्रत जी ने माहोल को वीर रस से सरोबार कर दिया और भीड़ से काफी तालीया और भारत माता जिंदाबाद के नारे लगने लगे |इतने अनपेक्षित रूप से भीड़ को चीरते हुवे एक युवक ""सद्दाम ""स्टेज पर चढ़ कर वेदव्रत जी पर हमला बोल दिया ,भीड़ ने हिम्मत दिखाते हुवे उस युवक की पकड़ के अच्छी ""ज्न्वारी "" कर दी और पुलिस के हवाले कर दिया |तभी तीन चार जनों ने भीड़ में से पुलिस के उपर पथर भाटो की बारिश कर दी और मस्जिद वाले चोक की तरफ भाग गये |पुलिस उन्हें वंहा ढूंढते हुवे पहुंची तो वंहा पुलिस पर और जबर्दस्त हमला हो गया |वंहा पुलिस अधीक्षक सहित छह पुलिसकर्मी घायल हो गये |
जिसमे राजेन्द्र सिंह नमक पुलिसकर्मी के सर में ९ टांके आये |
अब ये घटना क्या ब्यान करती हे और इस घटना को मिडिया दुआरा दबा देना क्या बयाँ करता हे |अगर ये ही घटना नरेंद्र मोदी के गुजरात में घटित हो जाती तो और करने वाला कोई हिन्दू होता तो मिडिया की मम्मी का खसम मर जाता |क्या कभी मुस्लिम कहेंगे की ये घटना दुर्भाग्यपूर्ण हे हम इस घटना के लिए इन युवको के लिए कड़ी से कड़ी सजा की मांग करेंगे ?कभी नहीं |इसी तरह के देश विरोधी और उत्पाती तत्वों को मुस्लिम समाज प्रश्रय देता रहता हे ,जेसे की गुजरात में था २००२ से पहले और फिर जब गोधरा होता हे तो उसका खामियाजा पूरे मुस्लिम समाज को उठाना पड़ता हे |मारवाड़ी में कहावत हे ""माल खावे माटी को ,गीत गावे बीरा का ""यानि माल तो पती का खाती हे लेकिन गीत अपने भाई के गाती हे |कुछ इसी तरह के ये मुस्लिम समाज के ये गद्दार लोगे हे जो पाकिस्तान की बुराई सुनना पसंद नहीं करते हे ,जबकि वो हरामी पल पोश के यंही बड़े होते हे |इनके समर्थन में छद्दम वामपंथी सेकुलर और कांग्रेसी लोग हमेशा अपनी ""मांड ""के तेयार रहते हे |नेनवा तो एक हिन्दू बाहुल्य क्षेत्र हे उसमे भी इसी तरह की दुर्भाग्य पूर्ण घटना हो गयी तो मुस्लिम बहुल्य इलाको में अनुमान लगाना कठीन हे की वंहा क्या घटित होता होगा ?

Friday, September 23, 2011

भारतीय शुद्ध नस्ल को संक्रमित करते सेकुलरता के वायरस !!!

जेसा की सभी जानते हे की विश्व  में सभी समुदायों ,सम्प्रदायों और धर्मो की अलग अलग पहचान ,अलग रीति रिवाज ,अलग तोर तरीके रहे हे और रहेंगे |हिन्दू धर्म को छोड़ कर सभी धर्मो ने विश्व में अपने अपने धर्म को सर्वश्रेष्ठ साबित करने और उसके अधिक से अधिक  अनुयायी बनाने के लिए मानवता का रक्त बहाने से ले कर सभी तोर तरीके अपनाये हे |हिन्दू धर्म अपनी उदारता ,   और नेकनीयती  ,वासुदेव कुटुंबकम्ब के कारण मानवता की सेवा में आज तक अडिग हे और रहा हे |
वर्तमान में भारत में रहने वाले  विभिन्न समुदायों और समाजो पर  सरसरी नजर डालने पर पाएंगे की भारत सभी धर्मो और मन्य्तावो के लिए एक आदर्श भूमि हे |सभी को यंहा पनपने का और एक सीमा में रह कर अपने धर्मो और विचारो के प्रचार प्रसार के लिए अनुमती हे ,बशर्ते की उनके विचार और प्रचार से रास्ट्र और दुसरे धर्म समुदायों के नुकसान दायक  ना हो |
ये आदर्श  स्थिति रास्ट्र की   एक बहुत अच्छी तस्वीर विश्व में प्रस्तुत करती हे |लेकिन यदि गोर से अध्यन किया जाये तो ये तस्वीर बिलकुल उल्ट , चिंताजनक और गंभीर दिखाई पडती हे |आम तोर पर हमेशा ये होता हे की अल्पसंख्यक समुदाय  (जो की भारत  में कत्रिम रूप से  बनाया गया एक समुदाय हे )को बहुसंख्यक समुदाय से हमेशा खतरा महसूस होता हे |लेकिन असल में खतरा अल्पसंख्यक समुदाय से यंहा बहुसंख्यक समुदाय को हो रहा हे अपना अस्तित्व और पहचान मिटाए जाने की हद तक !!कभी कभी विराटता को शुद्र्ता से इतना घातक  झटका लगता हे की जब तक कुछ समझ में आता हे बाजी हाथ से निकल चुकी होती हे और वो पहचान अपने अस्तित्व के लिए अन्तिम सांसे गिन रही होती हे !!इसका संक्रमन सब कुछ खत्म कर देता हे |अरबी जाहिल आक्रंतावो के लिए इस्लाम एक धर्म ना हो के खुनी साम्रज्यवाद था ,और अपने  सात  सो सालो के इतिहास में हिंदुवो और धर्म संस्कृति  का ज्यादा कुछ नहीं बिगाड़ पाए थे ,बाद में अंग्रेज आये उनका इतर उदेश्य अलग था ,लेकिन  ईसाई मिशनरियों के साथ उनकी हमदर्दी थी |

वर्तमान में विभिन्न प्रकार के जिहाद भारतीय समाज में संक्रमन के लिए चल रहे हे ,चर्चा में भी हे इनका उद्देश्य येन केन हिन्दू धर्म समज को दूषित करना हे .तोडना हे हीन भावना भरनी हे |इसी के फलादेश स्वरूप आप ने देखा होगा की अधिकतर हिन्दू लडकियों स्त्रियों को मुस्लिम और ईसाईयो दुआरा अपनी छद्दम पत्नी या प्रेयसी बनाया जाता हे |इनके इस एक तीर से कई   शिकार हो जाते हे ,विधर्मी अपनी कूवासना तो शांत कर ही लेते हे ,बल्की उस लडकी का परिवार bhi दूषित हो जाता हे ,या तो वो अपने आप खुद को हिन्दू समाज से अलग कर लेते हे या हिन्दू समाज उन्हें खुद अलग कर देता हे |इस प्रकार जिहादी हिन्दू इकाई से परिवार ,परिवार से समाज और समज से रास्ट्र तोड़ने का काम  बखूबी कर रहे हे|इस से भी घातक और खतरनाक स्थिति तब आती हे जब हिन्दू स्त्री या  लड़की और विधर्मी मलेच्छ पुरुष के दुआरा जो सन्तान भारतीय समाज के लिए इतनी घातक और खतरनाक होती हे की जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती हे ,क्योकि मुस्लिम पिता और हिन्दू माता की संतानों में एक अजीब सी विचारधारा और घातक द्र्स्टीकोण रास्ट्र समाज के  लिए पैदा हो जाता हे |
यदि  हम बायोलोजिकल  के बोट्निक्ल सिदांत     की अति सरल व्याख्या करेंगे तो भी यह स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी |आज कल विभिन्न तरह की फल सब्जियों की नस्ल को क्रोस कर कर के विभिन्न प्रकार की नयी नयी किस्मे पैदा की जा रही हे जो की बारह मास  हरी भरी रहती हे ,यकीन जब गुणवता की बात आती हे तो ""सारा  गुड गोबर हो जाता हे और याद करते ही मूह का स्वाद कसेला हो जाता हे |इसी प्रकार ये क्रोस हो कर पैदा किये हुवे हिन्दू माता और मुस्लिम विधर्मी पिता की वर्ण संकर संताने होती हे |ये रक्त संक्रमित और सकृतिक संक्रमित संताने विभिन्न प्रकार की कूधारनवो  की  उपज होती हे |क्योकि जब इनका विधर्मी पिता जब इनकी माँ के गर्भ में इनका बीज पटक रहा होता हे तो उसे पता होता हे की में में इस लड़की या इस स्त्री के साथ धोखा  कर रहा हूँ .तो आप सोच ही सकते हे की उस की मानस संताने किस नस्ल और मानसिकता वाली पैदा होंगी ?

इन वर्ण संकर संतानों को आजादी के पहले बड़ी ही हेय द्र्स्टी से देखा जाता था !!लेकिन आजादी के बाद नेहरु गाँधी खानदान ने इन्हें इज्जत बख्शने का बीड़ा उठाया और इस परिवार ने इन्हें अंग्रेजी का बड़ा ही इज्जतदार तमगा दिया ""सेकुलर ""हिंदी में धर्मनिरपेक्ष ?!!क्योकि नेहरु गाँधी खानदान स्वयम विभिन्न गंदी और सूगली जाती सम्प्रदायों का ""गन्दा बीलोना "" हे !!!पैदा होते ही अपने को अलग ही वातावरण  और माहोल में पा कर इन पैदा हुयी मानस सेकुलर संतानों का सबसे पहला उद्देश्य होता हे हिन्दू समाज और हिन्दू धर्म को गरियाना क्योकि में  पहले ही लिख चूका हूँ की इनकी माँ के गर्भ में इनका बीज पटकते समय ही इनके बाप का पहला उद्देश्य ये ही होता हे और रती क्रिया के समय भी वो ये ही मन्त्र  बोला करता हे की केसे हिन्दू धर्म और हिन्दू समाज को गरियाया जाये ?ये बड़ी शराफत से सेकुलरता का चोला ओढ़ कर मानवाधिकार करते करते हिन्दू धर्म समाज की खिलाफत करते हे ,जबकि इनके लिए मानवाधिकार का उल्लघंन सिर्फ और सिर्फ हिन्दू ही करते हे क्योकि ये वर्ण संकर सेकुलर अपने पितृ पक्ष के धर्म के प्रती छुपे हुवे मजबूत रहते हे और उसके विस्तार  के लिए जो हो सके वो करते हे |इनके बाप जो की अपनी धार्मिक कट्टरता कभी नहीं छोड़ते हे जरूरत पड़ने पर अपनी रखेल जेसी  पत्नी को छोड़ देते हे और जरूरत पड़ने पर बेच भी देते हे !!इनकी मानस सेकुलर संतानों का सबसे बड़ा हतियार ""सेकुलरता होती हे जिसे ये आम और भोले भले हिंदुवो को आसानी से बहका देते हे और वो धोखे  में आ जाता हे |इसी सेकुलरता का फायदा उठा कर ये हिन्दू समाज और परिवारों में पेठ जमा लेते हे और अपनी वर्ण संकरता की गन्दगी वंहा भी फेला देते हे ,क्योकि वेदेशी चन्दो और भीख से पोषित इनकी ठाठ बाट की जिन्दगी को आम हिन्दू आधुनिकता की निशानी मान कर भ्रम में आ जाता हे और हिन्दू लडकियों को ये आसानी से शिकार बना लेते हे |एक कड़ी बेल का ""तूम्बा ""मीठे तूम्बूवो में जा कर मीठा  हो जाता हे ,लेकिन ये वर्ण संकर इंसानी ""तूम्बे ""अकेले सो सूधार्मिक इंसानों को सेकुलर बना देते हे क्योकि घातक  संकरमन्ता   के वायरस  जल्दी फैलते हे ये बात विज्ञानं भी मानता हे |पिछले साठ सालो से ये प्रचारित किया गया हे आप सेकुलर नहीं हो तो  पिछड़ेपन की निशानी हे ?
यंहा वंहा संकरमण फेलाते ये वर्ण संकर सेकुलर तूम्बे हिन्दू समाज और रास्त्र के लिए भुत ही घातक हे ये और घातक साबित ना हो जाये इस लिए इनकी पोल खोलना भुत जरूरी हे |क्योकि सेकुलरता एक निरपेक्ष स्थिति ना हो कर एक गाली हे |क्या कोई सूधार्मिक धर्म सापेक्ष व्यक्ती क्रोस कर के पैदा हुवा कहलाना पसंद करेगा क्या ?और जो क्रोस होकर ही पैदा  हुवा वर्ण संकर हे और इस धरती पर एक शाप के रूप  में आ ही चूका होता हे  तो उसकी तो मजबूरी हो ही जाती हे की केसे दुष्प्रचार और झूट से अपनी स्थिति मजबूत की जाये ?क्योकि  इसके सीवा उसके पास कोई चारा भी नहीं होता हे |क्या इस पवित्र धरा पर एक हिन्दू धर्म निरपेक्ष होकर जीवन जी सकता हे ?
उतर _कभी नहीं क्योकि हिंदुत्व एक सिर्फ धर्म ना होकर एक सम्पूर्ण जीवन पद्दति  हे |
वन्देमातरम